भोपाल में 6 लोगों की आपबीती / सेल्फ क्वारैंटाइन लोगों ने कहा- समाज का व्यवहार उनके और परिवार के प्रति ठीक नहीं, लोग मजाक बना रहे

कोरोना के संक्रमण से बचाव की कोशिशों के बीच होम क्वारैंटाइन हुए लोगों ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। उनका कहना है कि सेल्फ क्वारैंटाइन होने पर समाज का व्यवहार उनके और परिवार के प्रति ठीक नहीं है। भोपाल में इस वक्त लगभग 329 लोग होम क्वारैंटाइन हैं। भास्कर ने ऐसे अनेक परिवारों से बात की। इसमें से सिर्फ उन लोगों की बात प्रकाशित कर रहे हैं, जाे खुद अपने अनुभव साझा करने तैयार हैं... पढ़िए उन्हीं की जुबानी…


लंदन से लाैटकर सेल्फ क्वारैंटाइन हूं, लाेगों के मजाक बनाने से बहुत दुखी हूं  


''मैं 7 दिन पहले लंदन से लौटा हूं। दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई स्क्रीनिंग में यह साफ हुआ कि मुझे कोरोना का संक्रमण नहीं है। फिर भी मैं दो दिन गुड़गांव में क्वारैंटाइन रहा। इसके बाद भोपाल आया। यहां एम्स और जेपी अस्पताल में स्क्रीनिंग हो चुकी है। कहा गया कि मुझे कोई दिक्कत नहीं है। आपको 14 दिनों तक क्वारैंटाइन रहना है। मेरे घर के बाहर एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें लिखा है कि यहां एक आदमी सेल्फ क्वारैंटाइन में रह रहा है। मैं अपने घरवालों से नहीं मिला। अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों से नहीं मिल रहा हूं। मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं घर से नहीं निकल रहा हूं, ताकि किसी को दिक्कत न हो। लोग मेरे घर का फोटो खींचकर यह बता रहे हैं कि यहां कोरोना का मरीज है। इससे मुझे बहुत मानसिक वेदना हो रही है। न मुझे न ही मेरे परिवार के किसी सदस्य को कोरोना का संक्रमण है। मेरा लोगों से आग्रह है कि ऐसे मजाक न उड़ाएं।''



पत्नी और दाे बच्चों सहित घर में हैं बंद, लोग क्वारैंटाइन का सम्मान करें, मजाक न उड़ाएं
''हम 22 मार्च को सिंगापुर से लौटे हैं। 3 साल और 7 साल के दो बच्चे भी हैं साथ हैं। हमने सरकारी सिस्टम की सलाह पर खुद को होम क्वारैंटाइन किया हुआ है। लोगों से मिलना-जुलना बंद है। घर में भी सब अलग-अलग रह रहे हैं। इसमें काेई शर्म या झिझक जैसी बात नहीं है। हमारे परिवार में किसी को भी सर्दी-खांसी या बुखार जैसी शिकायत नहीं है। हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कोरोना के खिलाफ इस राष्ट्रव्यापी जंग में हम सरकार के साथ खड़े हैं। इससे लड़ने का यही एकमात्र तरीका है। लोग क्वारैंटाइन का सम्मान करें। उनका मजाक न उड़ाएं।''



फ्रांस से लाैटकर मैं आइसाेलेशन में हूं, मम्मी-पापा तक से नहीं मिलता 
''मैं फ्रांस से 18 मार्च को लौटा हूं। मुझमें ऐसे कोई लक्षण नहीं है, लेकिन मैं बाहर से आया हूं, इसलिए होम क्वारैंटाइन हूं। यह कोरोना के संक्रमण से लड़ने का एकमात्र तरीका है। मुझे घर पर आइसोलेशन में रहना होता है। मम्मी-पापा से भी मैं नहीं मिलता। दूर से ही बात करता हूं। खाने-पीने की चीजें भी मुझे परिवार वाले कमरे के बाहर से देते हैं। मैं दिनभर नॉवेल पढ़ता हूं और वेब सीरिज देखता हूं। मैं स्वस्थ्य हूं और मुझे ऐसी कोई परेशानी नहीं है।'' 


क्वारैंटाइन में रहना कोई सजा नहीं है, इससे कोरोना का संक्रमण आगे नहीं बढ़ पाता 


''मैं 22 मार्च को पुणे से लौटा हूं। मैं स्वर्णजयंती एक्सप्रेस से लौटा था। सरकारी सिस्टम को कुछ संदेह था कि मैं विदेश से आया हूं, इसलिए उन्होंने मुझसे संपर्क किया। उन्होंने मुझे होम क्वारैंटाइन रहने की सलाह दी है। क्वारैंटाइन में रहना कोई सजा नहीं है। इससे संक्रमण के आगे बढ़ने का खतरा नहीं होता। कोरोना से जंग लड़ने के लिए हमें ऐसे ही सजग रहकर काम करने की जरूरत है। क्वारैंटाइन के दौरान हमें अपने परिवार से बच्चों से दूरी बनाकर रखनी है। जो भी चीजें आप छूते हैं, उसे दूसरों को न छूने दें। आपका एक-एक टच जहां हुआ है, उसे सैनेटाइज कीजिए। यदि आप 14 दिन तक क्वारैंटाइन रहेंगे तो संक्रमण खत्म हो जाएगा। यदि आप इस दौरान कोई नई स्किल सिंगिंग, रीडिंग, ड्राइंग जैसी चीजों को ज्यादा समय दे सकते हैं। मेरे लिए यह इन चीजों को करने का मौका है।''



क्वारैंटाइन में रहना कोई सजा नहीं है, इससे कोरोना का संक्रमण आगे नहीं बढ़ पाता 
''मैं 22 मार्च को पुणे से लौटा हूं। मैं स्वर्णजयंती एक्सप्रेस से लौटा था। सरकारी सिस्टम को कुछ संदेह था कि मैं विदेश से आया हूं, इसलिए उन्होंने मुझसे संपर्क किया। उन्होंने मुझे होम क्वारैंटाइन रहने की सलाह दी है। क्वारैंटाइन में रहना कोई सजा नहीं है। इससे संक्रमण के आगे बढ़ने का खतरा नहीं होता। कोरोना से जंग लड़ने के लिए हमें ऐसे ही सजग रहकर काम करने की जरूरत है। क्वारैंटाइन के दौरान हमें अपने परिवार से बच्चों से दूरी बनाकर रखनी है। जो भी चीजें आप छूते हैं, उसे दूसरों को न छूने दें। आपका एक-एक टच जहां हुआ है, उसे सैनेटाइज कीजिए। यदि आप 14 दिन तक क्वारैंटाइन रहेंगे तो संक्रमण खत्म हो जाएगा। यदि आप इस दौरान कोई नई स्किल सिंगिंग, रीडिंग, ड्राइंग जैसी चीजों को ज्यादा समय दे सकते हैं। मेरे लिए यह इन चीजों को करने का मौका है।''



हमने जिम्मेदारी समझी, खुद एम्स पहुंचकर जांच कराई, अब हाेम आइसाेलेशन में हैं 
''मैं परिवार समेत 11 मार्च काे दुबई यात्रा पर गया था। मेरे साथ इंदाैर में रहने वाले रिश्तेदार और भाेपाल से एक दाेस्त और उनकी पत्नी भी गई थीं। 18 मार्च काे लाैटे ताे एम्स पहुंचकर सूचना दी। वहां डाॅक्टराें की टीम ने हमारी जांच की, किसी तरह के लक्षण नहीं मिले हैं। ऐसे में हाेम आइसाेलेशन में रहने काे कहा गया है। तब से ही पूरा परिवार हाेम आइसाेलेशन में हैं। यात्रा के दाैरान उनके साथ पत्नी, बेटी और बेटा भी थे। ऐसे में इन लाेगाें ने खुद काे हाेम आइसाेलेशन में रखा हुआ है।''



दुबई से लौटकर एयरपोर्ट पर जांच कराई, अब मेरा पूरा परिवार होम क्वारैंटाइन है
''मैं 10 मार्च को परिवार के साथ दुबई से लौटी थीं। इंदौर एयरपोर्ट पर हुई स्वास्थ्य जांच में किसी भी सदस्य को कोई बीमारी नहीं थी। तब तक मप्र में कोरोना को लेकर किसी तरह की सख्ती नहीं थी, क्योंकि कोई केस नहीं मिला था। भोपाल आकर ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद जैसे ही कोरोना को लेकर सतर्कता बढ़ी। पूरे परिवार ने स्वयं को होम क्वारैंटाइन कर लिया। रोज सीएमएचओ से संपर्क रहा। अब 14 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन हम लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं।''



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